ओ बन्धुरे ! भजन बिना भी क्या जीना

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ओ बन्धुरे ! भजन बिना भी क्या जीना

ओ बन्धुरे ! भजन बिना
भी क्या जीना -2

बिना भजन के संध्या
हवन के जीवन ज्योति
जले ना ।। टेक ।।

भजन जग का फेरा
दो दिन का डेरा,
किसी का हमेशा है ना ठिकाना।

कोई आये कोई जाये,
काल की गाड़ी रुकेना ।।१।।
भजन……

हाट- हवेली, चेला चेली,
कुछ दिनों के, है सब साथी,
ममता बांधे डोल रही है,
समझा जिनको अपने ही।
वे ही जला देंगे अग्नि के अन्दर,
करेंगे दयत निन्दा ।।२।। भजन..

ओम् तू प्यारा सबका सहारा,
दाता सभी का जो दाता है,
उससे प्रीत करके सुरेन्द्र,
आनन्द पद चाहता है।
काम आयेगा सुख पायेगा,
उस पर कोई दुःखी ना ।।३।। भजन…..