नित्य स्वाध्याय सत्संग करते रहो

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नित्य स्वाध्याय सत्संग करते रहो (तर्ज- तुम अगर साथ देने का वादा करो)

नित्य स्वाध्याय सत्संग करते रहो,
एक दिन प्राप्त सज्ञान हो जायेगा।
शांति होगी परम भ्रांति मिट जायेगी,
पाप तापों का अवसान हो जायेगा।।

दूर हो जायेंगी स्वार्थ की भावना, छल,
कलह, द्वेष, अधिकार, लिप्सा स्वतः।
लक्ष्य की ओर सबके बढ़ेंगे चरण,
जब स्वकर्त्तव्य का ज्ञान हो जायेगा।।
शांति होगी परम…

पुष्प ज्यों हि खिला, बाग सुरभित हुआ,
भंग-विहंगों की आने लगी टोलियां।
सद्गुणों की सुगंधि लुटाते रहो,
सबके हृदयों में सम्मान हो जायेगा।।
शांति होगी परम…

तन से सेवा करो मन से सद्भावना,
धन से हरिये दुःखी-दीन की दीनता।
पुत्र भगवान् के हैं उन्हें खुश करो,
तुमसे खुश आप भगवान् हो जायेगा।।
शांति होगी परम…

आ पड़ी है घड़ी आपदा की कड़ी,
आर्यों जिम्मेदारी है तुम पर बड़ी।
आप यदि हैं सक्रिय, जाग्रित संगठित,
राष्ट्र का पूर्ण उत्थान हो जायेगा।।
शांति होगी परम…

मदद करने वाले हाथ,
प्रार्थना करने वाले
होठों से कहींअच्छे हैं।