नित ओ३म् के गुण गाऊँ मैं,भजन बिना जीवन सूना
नित ओ३म् के गुण गाऊँ मैं,
भजन बिना जीवन सूना,
नित ओ३म् के गुण गाऊँ मैं
सब धर्म के भाई प्यारे, (1)
भेद मिटा दो तुम सारे,
नित ओ३म् के गुण गाऊँ मैं
सर्वसाधारण में रम जाएँ,
विश्व व्याप्त, आर्यत्व जगाएँ,
आत्म-साधना की है ये ऋजु रीत
नित ओ३म् के गुण गाऊँ मैं,
भजन बिना जीवन सूना,
नित ओ३म् के गुण गाऊँ मैं
चुगली निन्दा ईर्ष्या द्वेष
मिट जाए सब रहे प्रेम शेष
नित ओ३म् के गुण गाऊँ मैं,
भजन बिना जीवन सूना,
नित ओ३म् के गुण गाऊँ मैं
आचार व्यवहार होवे विभूषित
एक दूजे का चाहें सुख हित
पीयूष संजीवन-रस का जावें पीत
नित ओ३म् के गुण गाऊँ मैं,
भजन बिना जीवन सूना,
नित ओ३म् के गुण गाऊँ मैं










