नेकी के कर्म कमा जा रे

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नेकी के कर्म कमा जा रे

नेकी के कर्म कमा जा रे,
दुनियाँ से जाने वाले।

यह तन तेरा तरूवर है,
नेकी एक क्षीर सागर है।
इस तरूवर के फल खाजा रे।।
दुनियाँ से……..

यह धन यौवन संसारी,
है दो दिन की फुलवारी।
कोई खुश रंग फूल खिलाजा रे।।
दुनियाँ………

तुझसे धन अन्त छुटेगा,
जाने किस राह लुटेगा।
इसे परहित हेत लगाजा रे।।
दुनियाँ……….

जग सेवा है सुख देवा,
कर दीन दुःखी की सेवा।
यश पाना है तो पा जा रे।।
दुनियाँ………

यह कञ्चन काया तेरी,
अन्त राख की ढेरी।
इससे जो बने बनाजा रे।।
दुनियाँ से…….

संसार की भीड़ से
निकलना नहीं,
किन्तु भीड़ को अन्दर से
निकालना है।
एकान्त में जाना नहीं,
किन्तु एकान्त को
अन्दर लाना है।