नर-नारी सब प्रातः शाम
नर-नारी सब प्रातः शाम,
भज लो प्यारे ओम् का नाम ।
ओम् नाम का पकड़ सहारा,
जो है सच्चा पिता हमारा।
वो ही है मुक्ति का धाम,
भज लो प्यारे ओम् का नाम ॥
‘कितना सुन्दर जगत् रचाया,
सूर्य-चाँद, आकाश बनाया।’
गुण गाता है जगत् तमाम,
भज लो प्यारे ओम् का नाम ॥
पृथिवी और पहाड़ बनाए,
नदियाँ-नाले खूब सजाए।
बिन कर कर्म करे निष्काम,
भज लो प्यारे ओम् का नाम ॥
ऋषि-मुनियों ने ओम् ही ध्याया,
अन्त न इसका किसी ने पाया।
करते हैं इसको प्रणाम,
भज लो प्यारे ओम् का नाम ॥
मन अपने को शुद्ध बनाएँ,
विषय-विकारों से बच जाएँ।
वेदों का यह ही फरमान,
भज लो प्यारे ओम् का नाम ॥
हीरा जन्म गँवाओ ना तुम,
‘नन्दलाल’ घबराओ ना तुम।
सन्ध्या करो सुबह और शाम,
भज लो प्यारे ओम् का नाम ॥










