निराकार निर्विकार सर्वाधार ओंकार ।
निराकार निर्विकार सर्वाधार ओंकार ।
ओंकार, ओंकार, ओंकार, ओंकार ॥
अणु अणु में व्यापक कौन विभु ?
सर्वोपास्य अकाय है कौन प्रभु ?
कौन कवि मनीषी तथा परि भू ?
अजरामर विराट् तथा स्वयंभू
कौन सकल चराचर का कर्त्तार ?
ओंकार, ओंकार, ओंकार, ओंकार ॥
किसका वेदों में है गुणगान हुआ ?
“ओं क्रतो स्मर” का बखान हुआ ॥
ऋषि मुनियों ने किस का था नाम लिया।
योगिजनों ने किस का था ध्यान किया।
कौन ज्ञान गिरा से अतीत, अपार ।
ओंकार, ओंकार, ओंकार, ओंकार ॥
“तदेजति तन्नौजति” कौन विभु ?
“सब से दूर समीप भी” कौन प्रभु ?
“वही अन्दर व बाहर” विश्वपति ।
जिसे ध्याते रहे सिद्ध योगी यति ॥
कौन ब्रह्म कृपालु दया-भंडार ?
ओंकार, ओंकार, ओंकार, ओंकार ॥
आओ दिव्य दयालु का ध्यान करें ।
दैवी नौका पै चढ़ भव-सिन्धु तरें ॥
अन्तःकरण में दर्शन उसका करें ।
सदा पापों कुकर्मों से पाल डरें ॥
श्रद्धा भक्ति की बहती रहे जल-धार ।
ओंकार, ओंकार, ओंकार, ओंकार ॥










