कृतज्ञता
नमस्कार भगवान तुम्हें, भक्तों का बारम्बार हो।
श्रद्धा रूपी भेंट हमारी, मंगलमय स्वीकार हो।।
तुम कण-कण में बसे हुए हो, तुझ में जगत समाया है।
तिनका हो चाहे पर्वत हो, सभी तुम्हारी माया है।
तुम दुनियाँ में हर प्राणी के, जीवन का आधार हो।
श्रद्धा रूपी भेंट हमारी……
सब के सच्चे पिता तुम्हीं हो, तुम्हीं जगत की माता हो।
भाई बन्धु सखा सहायक, रक्षक पोषक दाता हो।
चींटी से लेकर हाथी तक, सब के सिरजनहार हो।।
श्रद्धा रूपी भेंट हमारी………
ऋषि मुनि योगी जन सारे, तुझ से ही वर पाते हैं।
क्या राजा क्या रंक तुम्हारे, दर पे शीश झुकाते हैं।
परम दयालु परम कृपालु, करुणा के भण्डार हो।।
श्रद्धा रूपी भेंट हमारी……
तूफानों से घिरे ‘पथिक’ प्रभु, तुम ही एक सहारा हो।
डगमग डगमग नैया डोले, तुम ही नाथ किनारा हो।
तुम खेवट हो इस नैया के, और तुम ही पतवार हो।।
श्रद्धा रूपी भेंट हमारी………..










