नाम प्रभु का प्यारा ओम् प्यारा ओम् ।
नाम प्रभु का प्यारा ओम् प्यारा ओम् ।
दाता पालनहारा ओम् , प्यारा ओम् प्यारा ओम् ॥
दूध में है घी सितार के सुरों में राग है ।
है तिलों में जैसे पत्थर में आग है ।
कण-कण में विस्तारा ओम् प्यारा ओम् प्यारा ओम् ।।
जो विराजमान है आकाश में पाताल में ।
एक भविष्य वर्तमान भूतकाल में ।
अमृत रस की धारा ओम् , प्यारा ओम् प्यारा ओम् ।
ओम् इष्ट देव पूजनीय है जहान का।
और कहीं दूसरा न कोई जिसकी शान का ।
कुल दुनिया से न्यारा ओम् , प्यारा ओम् प्यारा ओम् ॥
सूर्य और चाँद जिसकी आरती उतार ते ।
नेति नेति कह के जिसको वेद भी पुकारते ।
‘ पथिक ‘ सबका सहारा ओम् ,
प्यारा ओम् प्यारा ओम् ॥४ ॥










