नाम धर्म का जब तक भी मजहब पन्थों से जोड़ोगे।

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नाम धर्म का जब तक भी मजहब पन्थों से जोड़ोगे।

नाम धर्म का जब तक भी
मजहब पन्थों से जोड़ोगे।
सदियों बाद मिली आजादी के
लोकतन्त्र को तोड़ोगे ॥
धर्म धैर्य क्षमा सत्यता,
नारा नहीं जेहाद का है।


अपने सा दुख-सुख है
सबका ये भूत नहीं उन्माद का है।
मजहब ने हकीकत कत्ल किया
जहां नाम नहीं फरियाद का है।
पागलपन और जनून भरी
मजहब की जो चादर ओढोगे॥1॥

मजहब ने भाई मतिराम के
रंगा खून से था आरा।
मजहब ने गुरु तेगबहादर का
सर धड़ से किया न्यारा॥
जिसका है प्रमाण अभी
दिल्ली में शीशगंज गुरुद्वारा।
सरियत के कानून के ऊपर
जो भारत को छोड़ोगे ॥2॥

मजहब ने ही कहर कभी
सरहिन्द शहर में ढाया था।
जिन्दे बच्चों को याद करो
दीवार में जब चिनवाया था॥
मांस वैरागी बन्दे का
सण्डासियों से खिंचवाया था।
मजहब की करतूत है
ये क्या तुम भी रक्त निचोड़ोगे ॥3॥

मजहब ने कश्मीर में देखो तो
कलियों का कुचल दिया।
लाखों परिवार उजाड़ दिये
निर्दोषों का कर कत्ल दिया॥
‘कर्मठ’ भगवान ही मालिक
जो बेसमझी परना अमल किया
परिणाम सामने है सबके
तकदीर देश की फोड़ोगे॥4॥