न यह तेरा न यह मेरा, मंदिर है भगवान का।

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कृतज्ञता

न यह तेरा न यह मेरा,
मंदिर है भगवान का।
पानी उसका भूमि उसकी,
सब कुछ उसी महान का।।1।।

हम सब खेल खिलौने उसके,
खेल रहा करतार रे।
उसकी ज्योति सबमें चमके,
सबमें उसी का प्यार रे।।2।।

तीर्थ जाये मंदिर जाये,
अनगिन देव मनाए रे।
दीन रूप में प्रभु खड़े हैं,
देख के नैन चुराए रे।।3।।

मन मंदिर में दर्शन कर ले,
उस प्राणों के प्राण का।
मन की आँखें खुल जाये तो,
क्या करना और ज्ञान का।।4।।

कौन है ऊँचा कौन है नीचा,
सब हैं एक समान रे।
प्रेम की ज्योति जगा हृदय में
सब प्रभु पहचान रे।
सरल हृदय को शरण में राखे,
प्रभु भोले नादान रे।।5।।

न यह तेरा न यह मेरा,
मंदिर है भगवान का।
पानी उसका भूमि उसकी,
सब कुछ उसी महान का।।6।।

सुविचार

ईशावास्यमिदं सर्वम्
ईश्वर विश्व के कण-कण में व्याप्त है।