ना पटको जीवन की माला

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ना पटको जीवन की माला

ना पटको जीवन की माला
ये मोती टूट जायेगें,
तुम्हारे सपनों के सावन
नहीं तो रूठ जायेगें,
दिये की ज्योति को दे दो
स्नेह का तेल और बाती,
मंडळ दिवाली जगमगायेगी
उजाले मुस्करायेंगे।।१।।

तुम्हारे भावो की रचना
मधुर संसार बनाती है,
अगर सत्यम् शिवम् सुन्दरम्
के नगमें गुनगुनायेगे।। २।।

यदि समझो तो सब अपने
दिलो से बनते है रिश्ते,
आत्मवत् वेदनाओं को
सभी गर जान जायेगें ।। ३।।

दया और सहानुभूति ही
सुभाषित है ये जीवन के
सम्भाले रखना बस इनको
हमेश काम आयेगें।।४।।

तेरे शुभ कर्म ही साथी
सफर में काम आते है,
सुरेन्द्र में तेरे वैभव न
हरगिज साथ जायेगें ।।५।।