ना कोई उसका मकां, ढूँढता है तू कहाँ।

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ना कोई उसका मकां, ढूँढता है तू कहाँ।

तर्ज – जब चली ठंडी हवा…….

ना कोई उसका मकां,
ढूँढता है तू कहाँ।
वो प्रभु दिल में छुपा,
वेद करते हैं बयाँ।

है सदा रोशन उसी से,
चाँद सूरज ये फिज़ा वो “
सचिन” सबमें समाया,
हो बहारें या ख़िज़ा आ
रही है ये सदा, है कहीं
तो आशियाँ वो प्रभु दिल में……

सन्तों ने ढूंढ़ा उसे,
ना कभी पाया कहीं
आसमाँ की खोज की,
ढूंढ़ डाली ये जमीं ना
मिला वो मेहरबां, ढूंढ़
कर सारा जहाँ वो प्रभु दिल में……

हर जगह मौजूद है,
इस जहाँ में वो प्रभु
आँख से ना देख सकते,
वेद कहते है विभु ना
मिला उसका निशां,
ना मिला कोई पता वो प्रभु दिल में…….

कर इबादत ओ बशर,
उस परम सुखधाम की
झोलियाँ नादान भर लें,
उस प्रभु के नाम की ये
बहारें ये समां, कह रही है
दास्ताँ वो प्रभु दिल में….