ना हम ना हम मोहम्मद के चेले

0
40

ना हम ना हम मोहम्मद के चेले

ना हम ना हम मोहम्मद के चेले,
ईसा के थैले,
ना हम अनुयायी कर्मचन्द के।। टेक ।।
हम हैं सिपाही दयानन्द के।। टेक ।।

जुल्मों सितम के
आगे झुकना ना जाने,
आंधी तूफानों में भी
रुकना ना जाने,
साथी नहीं हैं मति मन्द के,
हम हैं सिपाही दयानन्द के ।।1।।

निवलों विकलो को जाने
करना हम प्यार भी,
ईंट का बदला पत्थर
जाने व्यवहार भी,
हम हैं विध्वंसक दुर्गन्ध के,
हम हैं सिपाही दयानन्द के । ।2।।

छिप-छिप गुरू मंत्र
हम देते नहीं कान में,
शंका समाधान कर लो
आओ मैदान में,
रहते नहीं हैं कभी फन्द के,
हम हैं सिपाही दयानन्द के ।।3 ||

ईश्वरीय नियम के
और सृष्टि के क्रम के,
जो है प्रतिकूल मूल
लक्षण हैं भ्रम के,
इच्छुक यूं सब हैं
प्रेमी छन्द के,हम
हैं सिपाही दयानन्द के ।।4।।