ना डर है चीन का ना डर है रूस का।

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ना डर है चीन का ना डर है रूस का।

ना डर है चीन का
ना डर है रूस का।
डर है तो डर है देश
द्रोही मनहूस का।।
देश द्रोही कभी नहीं
जुल्म करने से डरता है,
जिस नैया में बैठे उसे ही
फोड़ के पानी भरता है,
करता है काम दुश्मन
रिपु के जासूस का।।1।

घर का भेदी लंका ठहाये
दुनिया यह कहती है,
समय समय पर भारत मां
को यही बीमारी दहती है,
रहती है चिन्ता घर में
दुश्मन चाहे फूंस का।।2।।

लानत जबान जो ना
देश हित व्याख्यान दे,
धिक्कार उस वीर को
जो देश पै ना जान दे,
धनी जो ना दान दे डर
कृपण कंजूस का।।3।।

पहुँचती है हानि प्रेमी
देश को कपूतो से,
रंगा है इतिहास इनकी
काली करतूतों से,
पीटो इन्हें जूतों से
द्वश्य कर जलूस का।।4।।