मुझे मारकर वो मेरा क्या करेगें।

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मुझे मारकर वो मेरा क्या करेगें।

मुझे मारकर वो मेरा क्या करेगें।
मैं फानी नहीं हूँ फना क्या करेगें।

हथेली पर जो सिर लिए फिर रहा हो।
वो सर उसका धड़ से जुदा क्या करेगें…।।१।।

जिन्हें दर्दे दिल से फुरसत नहीं है।
वो दर्दे वतन की दवा क्या करेगें….।।२।।

हमीं गर्क करते हैं जब अपना बेड़ां तो
बताओ फिर नाखुदा क्या करेगें…।।३।।

जिन्हें बात सुनना भी भाता नहीं है।
वो पूरादिली मुद्दआ क्या करेंगे….।।४।।

जो लड़ते हैं दिन रात वो बात बाहम,
दयानन्द का हक अदा क्या करेंगे…।।५।।

भले खुद नहीं हैं जो इन्सा ‘मुसाफिर’।
भला वह किसी का भला क्या करेगें….।। ६ ।।