मुझे मारकर वो मेरा क्या करेंगे।
मुझे मारकर वो मेरा क्या करेंगे।
मैं फानी नहीं हूं फना क्या करेंगे।
भले खुद नहीं हैं
जो इन्सा ‘मुसाफिर’ भला
वह किसी का भला क्या करेंगे….।
हथेली पर जो सिर लिए
फिर रहा हो-
वो सर उसका धड़ से
जुदा क्या करेंगे।
जिन्हें दर्दे दिल से
फुरसत नहीं है-
वो दर्दे वतन की दवा
क्या करेंगे….।
हमीं गर्क करते हैं जब
अपना बेड़ा तो बताओ
फिर नाखुदा क्या करेंगे….।
जिन्हें बात सुनना
भी भाता नहीं है
वो पूरा दिली मुद्दआ
क्या करेंगे….।
जो लड़ते हैं दिन रात
वो बात बाहम दयानन्द का
हक अदा क्या करेंगे….।










