मोहे अन्तर वो स्वर भर दे

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मोहे अन्तर वो स्वर भर दे

ओ३म् परि॑ प्रि॒या दि॒वः क॒विर्वयां॑सि न॒प्त्यो॑र्हि॒तः ।
सु॒वा॒नो या॑ति क॒विक्र॑तुः ॥

ऋग्वेद 9/9/1

मोहे अन्तर वो स्वर भर दे
बाजें हृदय के तार

अपने स्वर ऐसे भर दे
जो मेरी सुध-बुध हर ले
बाजें हृदय के तार

गीत भरे जो शशि तारों में
मोहे भी दे झँकार
बाजें हृदय के तार

ये मन मेरा मन्दिर तेरा
गीत बने उपहार
बाजें हृदय के तार

मेरी वीणा के स्वर सोये
स्वर की दो झँकार
बाजें हृदय के तार

प्रेम के तेरे भाव सँजोये
प्रेम के हो आधार
बाजें हृदय के तार

आओ अपने आप बजाओ
मन तन्त्री के तार
बाजें हृदय के तार

मेरे मन में, सारे गगन में
गूँज उठे झँकार
हे अक्षर ओंकार

मोहे अन्तर वो स्वर भर दे
बाजें हृदय के तार

रचनाकार :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई
स्वर :- श्रीमती अदिति जी शेठ
राग :- बिहाग