मिट्टी के पुतले चलना पड़ेगा जरूर।
मिट्टी के पुतले चलना
पड़ेगा जरूर।
गांव तेरा बड़ा दूर-मिट्टी के
पुतले चलना पड़ेगा जरूर।
मिले काठ की सवारी रहे
पूछ नर-नारी,
आज कहां की तैयारी
जरा बोल तो सही।
लई तगड़ी भी तोड़ रह
गए करोड़,
लिए पैर क्यों सिकोड़
जरा बोल तो सही।
‘लक्ष्मण’ क्यों बिखरा तेरा नूर….।
इस पे ना कर तूं गरूर….।
तेरा रोब ये रंगीला
और बदन गठीला,
तूं जवान भी सजीला चले
झूम-झाम के। ये जो फूलसी जवानी
चन्द रोज की निशानी,
आनी जानी ये जवानी
रख रोकथाम के।
ये जो राजशाही ठाठ
और भूमि के प्लाट, हाट,
ठाठ बाट सब यहीं रह जायेंगे।
ये जो माया के मकान,
ध्यान रहे ये दलान,
सब कह जायेंगे।
होंगे सभी ये चकनाचूर….।
कोई कहे भाई-बाप,
सब करेंगे विलाप
आप पड़े चुपचाप कोई
बोलेगा ना चालेगा।
नाड़ियां टटोल कोई
मुख तेरा खोल कोई
पानी चार तोले
तेरे मुख बोच डालेगा।
रोयेंगे खड़े हो मजबूर….।










