मिटाले मैल अरे नादान
मिटाले मैल अरे नादान,
मिले मन मन्दिर में भगवान् ।
गंगा-यमुना जी के तट पर,
गोकुल मथुरा वंशीवट पर।
नाहक क्यों होता हैरान,
मिलें मन मन्दिर में भगवान् ।।
मिटाले….
कस्तूरी मृग की नाभि में,
मूरख ढूँढत वन झाड़ी में।
खोता भटक-भटक निज प्राण,
मिले मन-मन्दिर में भगवान् ।।
मिटाले…..
तेरे पास बसा है प्यारा,
फिर भी तुझको मारा मारा।
निशिदिन भटकता अज्ञान,
मिलें मन मन्दिर में भगवान् ।।
मिटाले….
तज अज्ञान शुद्ध कर निजमन,
निश्चय हो ‘प्रकाश’ प्रभु दर्शन ।
पावें तू आनन्द महान्,
मिलें मन मन्दिर में भगवान् ।।
मिटाले….










