मिले शान्ति वह प्रभुवर हमको

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मिले शान्ति वह प्रभुवर हमको

मिले शान्ति वह प्रभुवर हमको ।। टेक ।।
जो रवि किरणों में मुस्काए ।
अन्तरिक्ष को जो महकाए ।
वसुधा पर सौरभ बन छाए।
व्यापक रह जल के स्रोतों में।
करें सुखी जीवन भर हमको ।। १ ।।

श्यामल श्यामल वन उपवन में।
विविध अन्न फल पत्र सुमन
ये जीव जगत के अवलम्बन ये।
रहें निरापद करें समर्पित।
चषक शान्ति के भर भर हमको ।। २ ।।

सुखद शक्तियां भौतिक सारी ।
विद्वदृन्द न मिथ्याचारी।
रोपें नहीं अनय की क्यारी।
ताप शाप से मुक्त सर्वथा।
स्वस्ति शान्ति का वर दो हमको ।। ३ ।।

सब अपना कर्तव्य निबाहें।
मुक्त ज्ञान की हों सब राहें।
सब सबकी ही उन्नति चाहें।
रहे शान्ति ही शान्ति सर्वतः ।
प्रभु इतना मृदु करदो हमको ।। ४ ।।