मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकले।

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मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकले।

मेरी रसना से प्रभु तेरा नाम निकले।
हर घड़ी हर पल ओ३म् नाम निकले।।
तेरी भक्ति के गीत प्रभु गाया करू।
अपने हृदय को शुद्ध बनाया करूँ।
तेरी याद में ही सुबह और शाम निकले।।
हर घड़ी…

मैं तो ओ३म् ही ओ३म् ध्याया करू।
सच्ची श्रद्धा की अग्नि जलाया करूँ।
तेरी मस्ती में दिन और रात निकले।।
हर घड़ी…

मन मंदिर में ज्योति जगा देना।
मल विक्षेप आवरण हटा देना।
तेरे ध्यान में ही उमर तमाम निकले।।
हर घड़ी…

रोम-रोम में ओ३म् बसाऊ मैं।
शुभ कर्मों की भेंट चढ़ाऊँ मैं।
ओ३म् जपते ही अन्तिम श्वास निकले।
हर घड़ी हर पल तेरा नाम निकले।।