मेरी प्यारी बहिनो अकल कहाँ गंवाय दई?

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मेरी प्यारी बहिनो अकल कहाँ गंवाय दई?

मेरी प्यारी बहिनो अकल
कहाँ गंवाय दई ?

पीरों फकीरों के पाँवों
में लागी अपने पति की
सेवा भुलाय दई।

गाली बकौ बुरो व्याह
के समय में, हाँ अविद्या
यह किसने पढ़ाई दई।

मोर मुहर्रम गाजी मियाँ
की खोली बतासों से कबरें भराई दई।

आप ही मरे क्या जिलावें
किसी को क्या कुछ
समझ बहिन तू बह गई।

झाड़ों के वृक्षों की पत्थरों
को पूजो चेतन बना के
हाय देवी बताय दई।

ग्रह के फलों को बड़ा
सच्चा मानो झूठों ने
अपनी यह माया फैला दई।