मेरी लाड़ली बेटी बहाती क्यों आँसू

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मेरी लाड़ली बेटी बहाती क्यों आँसू

मेरी लाड़ली बेटी बहाती क्यों आँसू,
बाबुल के घर को भुलाना पड़ेगा।
नहीं तू वो शयः जिसको रखलूं मैं घर पर,
अमानत जहां की तू जाना पड़ेगा ॥ टेक ॥
परेशान हूं बाप बेटी का बनकर ।
आपही करेला कडुवा और नीम पर॥
है दुवा के सिवा और क्या दूं मैं तुझको,
गरीबी में सर को झुकाना पड़ेगा ॥1॥ मेरी

अब तक मेरी लाज निभाई है बेटी।
आगे भी जाकर निभाये तो जानूं॥
जिस घर को डोली चली तेरी उठकर,
उस घर को अपना बनाना पड़ेगा ॥2॥ मेरी

सास और ससुर की खिदमत फर्ज है ये तेरा,
ननद हो गले से लगा प्यार करना।
ये दस्तूर है दुनियादारी का बेटी,
मयके की लाज रखकर निभाना पड़ेगा ॥3॥ मेरी

दुरानी जिठानी के सुनकर के ताने,
कान और जुबां अपनी को बन्द रखना।
ये तल्खिये जहर भी तुझको पीकर,
होठों से अपने मुस्कराना पड़ेगा ॥4॥ मेरी

नसीयत ये बाबुल की रहे याद तेरे,
ना शोहर को अपने नाराज रखना।
जुबाँ में तू रखना सदा अपनी शीरी,
वो रूठेंगे तुझको मनाना पड़ेगा॥5॥मेरी

तेरे दर से भूखा अतिथि ना जाये,
आर्यों का गौरव ‘कर्मठ’ नेकी के कामों से।
हवन की रहे खुशबू दीवारों दर में,
पढ़ो वेद औरों को पढ़ाना पड़ेगा ॥6॥ मेरी