मेरी जान ! ऐसा गीत गा तू

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मेरी जान ! ऐसा गीत गा तू

मेरी जान !
ऐसा गीत गा तू
ऐसी लय और तान उठा तू
मौन असीम संगीत के स्वर
हृदय पर कर दें अकत असर
के परिमित शब्द लगें तुच्छकर
दृष्टि दैवीय हो तेरी पूत
इसकी ज्योति से हो जाए सूच
मेरी जान !
ऐसा गीत गा तू

कर ले उपासना जीवन में
उपास्य के गुण कर धारण
कामना होती जाए सफल
सिद्धि पाए कान्ति बन
हर चेष्टा में कविता होगी
बन जाएगा काव्य-जीवन
होगी बोलने हंसने में


दिव्य छटा का अनुक्रम
होगा धर्म-मेघ का गायन गर्जन
शब्द सीमाओं की लय का घन
निर्मल होगा विश्व-वातावरण
मेरी जान !
ऐसा गीत गा तू
ऐसी लय और तान उठा तू

कान्ति मूर्त कविता की बन
दिव्य ज्योति तू कर ले सवन
कर दे ज्योतिर्मय सन्सार
एक दीप से अगणित दीपन
इन दीपों की दीपशिखा से


कथा सुनो प्रादुर्भाव की
गीत, तान, आलापों की
महात्मा के सद्भावों की
मेरी जान सुना जा
उज्जवल कथन
दिव्य दीप-शिखा हो उपंग
होवे सन्सार का स्वस्त्ययन


मेरी जान !
ऐसा गीत गा तू
ऐसी लय और तान उठा तू
मौन असीम संगीत के स्वर
हृदय पर कर दें अकत असर
के परिमित शब्द लगें तुच्छकर
दृष्टि दैवीय हो तेरी पूत
इसकी ज्योति से हो जाए सूच
मेरी जान !
ऐसा गीत गा तू