मेरे मनवा तू गा, गा के नगमा सुना।

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मेरे मनवा तू गा, गा के नगमा सुना।

तर्ज – मेरे बचपन तू जा……

मेरे मनवा तू गा, गा के नगमा सुना।
गा रेगा, कोई गीत प्रभु का गा॥ गा रे गा……

मैंना पपीहा मोर भी,
उसका ही गान गा रहे
झूम-झूम कर ओ ‘सचिन’,
उसी की शरण में जा रहे
तू भी वादा निभा, वेदों की है
सदा गा रे गा कोई गीत……….

सामने उसी के सर झुका,
जिसने रचा है ये जहाँ रहता है
तेरे पास वो, ढूंढ़ता है उसको
तू कहाँ साज़ दिल का सज़ा,
खूब खुशियाँ मना गा रे गा कोई गीत……

मौका है तेरे हाथ में,
हाथ से ये जाये ना निकल
लौट के समय ना आयेगा,
राहों में जाना ना फिसल
उर में ज्योति जगा,
करके भक्ति दिखा गा रे गा कोई गीत……..

नूर है उसी का चाँद में,
उसी से है रोशन आसमाँ
ढूँढना जो चाहे ढूंढ ले,
तेरे ही दिल में है मकां थोड़ा
सर को झुका, आयेगा रे
मज़ा गा रे गा कोई गीत……….