मेरे मन मन्दिर में हे प्रभु जी !
मेरे मन मन्दिर में
हे प्रभु जी !
जग मग ज्योति जगाओ
अँधियारे में भटक रही हूँ
अब तो राह दिखाओ
जग मग ज्योति जगाओ
दु:ख से मेरी भीगी पलकें
दर्द किनारी पल पल छलके
खुशियों का सागर
इन आँखों में,
लहर लहर लहराओ
हे प्रभु जी !
मेरे मन मन्दिर में
हे प्रभु जी !
जग मग ज्योति जगाओ
देख रही नित, अजब तमाशा
पल में आशा, बने निराशा
ऐसी आँख मिचौली से अब
मुझको मत बहलाओ
हे प्रभु जी !
मेरे मन मन्दिर में
हे प्रभु जी !
जग मग ज्योति जगाओ
ऐसा वर दो , ऐसा कर दो
प्यार का रस,
हृदय में भर दो
तन मन का सब,
दु:ख मिट जाये
ऐसा गीत सुनाओ (1)
हे प्रभु जी !
मेरे मन मन्दिर में
हे प्रभु जी !
जग मग ज्योति जगाओ










