मेरे मालिक प्रभो सब से न्यारे।

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मेरे मालिक प्रभो सब से न्यारे।

(तर्ज-रात भर का है महमां अन्धेरा)

मेरे मालिक प्रभो सब से न्यारे।
बेसहारों के तुम हो सहारे।

आज आया हूँ मैं तेरे द्वारे।
बेसहारों के तुम हो सहारे।
मेरे मालिक प्रभो सब से न्यारे…..

१. दीन दुःखियों का तू आसरा है।
टेर सुनता है सब की सुना है।
मेरा दिल भी तुझे ही पुकारे ।
बेसहारों के तुम हो सहारे ।
मेरे मालिक प्रभो सब से न्यारे……

२. तुम ही सब से बड़े देवता हो।
नाख़ुदाओं के भी नाख़ुदा हो।
मेरी नैया लगा दो किनारे ।
बेसहारों के तुम हो सहारे ।
मेरे मालिक प्रभो सब से न्यारे…..

३. सारी दुनियाँ के मुश्किल कुशा से।
शहनशाहों के भी शहनशाह से।
माँगता हूँ मैं झोली पसारे।
बेसहारों के तुम हो सहारे ।
मेरे मालिक प्रभो सब से न्यारे…..

४. और किस की शरण में मैं जाऊँ ।
दासतां अपनी किसको सुनाऊँ।
जब ‘पथिक’ बन्द हैं द्वार सारे ।
बेसहारों के तुम हो सहारे ।
मेरे मालिक प्रभो सब से न्यारे…..