भक्ति
मेरा उद्देश्य है यही, आज्ञा को तेरी पालना,
कर के कमाई धर्म की, चरणों में तेरे डालना।
मानव के नाते जो जाऊँ, तुझको भूल मैं कभी,
विनय है मेरी आपसे बनकर सखा संभालना।
मेरा उद्देश्य है यही …………
जितने भी यज्ञ-कर्म हों, श्रद्धा, प्रेम से करूँ,
आयें अभद्र भाव जो, उनको सदा तू टालना।
मेरा उद्देश्य है यही ……..
रक्षा तो तुम मेरी करो, रक्षा में तेरी मैं रहूँ,
अपने गुणों के साँचे में, जीवन को मेरे डालना।
मेरा उद्देश्य है यही ……….
मृत्यु का मुझको भय न हो, माँगू मैं तुझसे वर यही,
मेघा बुद्धि की भिक्षा भी, झोली में मेरी डालना।
मेरा उद्देश्य है यही ……..
सुविचार
नास्य क्षीयन्त ऊतयः ।
ईश्वर की रक्षाएं कभी कम नहीं पड़तीं।










