मनीषा मनीषा बढ़ती जा, निज प्यारे प्रभु को वरती जा
मनीषा मनीषा बढ़ती जा
निज प्यारे प्रभु को वरती जा
गाती जा प्रभु की अद्भुत महामहिमा
हे अग्ने ! हे तेजपुञ्ज !
मार्गदर्शक अग्रनेता
हो सबके उद्धारक
समझी तेरी कृपा
मनीषा मनीषा बढ़ती जा
निज प्यारे प्रभु को वरती जा
गाती जा प्रभु की अद्भुत महामहिमा
कर रहे स्तुतियाँ,
विनत-वन्दन
भक्ति गायन रस भरा
तुझको पाने, रसमय रसना
बन रही गीतों की स्वरा
हो ऽऽ
आज कोई सच्चा भक्त
विनती कर रहा है
तुमसे मिलने के दिन
गिनती कर रहा है
शरण दे दो ना प्रभुवर !
तराशो स्तुति के स्वर
तेरे सिवा बरसेगी
किसकी कृपा
मनीषा मनीषा बढ़ती जा
निज प्यारे प्रभु को वरती जा
गाती जा प्रभु की अद्भुत महामहिमा
उन्मुख हो रही,
तृसित मनीषा
प्यास बुझा दे, हे दाता!
उत्कट इच्छा, है तुम रीझो
रट रही रसना, नाम तेरा
होऽऽ
आज सच्चा भक्त मिला है
ले लो साँस चैन की
पाँव तेरे पड़ रहा है
लाज रख लो बैन की
तुम्हारी कृपा पाने
तरस रहा है मन
मन, बुद्धि, चित्त, आत्मा
को रङ्ग दो खरा
मनीषा मनीषा बढ़ती जा
निज प्यारे प्रभु को वरती जा
गाती जा प्रभु की अद्भुत महामहिमा
जैसे नदियाँ , करें समर्पण
आश्रय पातीं सिन्धु का
वैसे महिमा, गाती वाणीयाँ
आश्रय पाएँ, बन्धु का
हो ऽऽ
हमारी मनीषा वाणीयाँ
तुम्हारे लिए हैं
तुमने ही सच्चे भक्त
स्वीकार किए हैं
स्तुति वाणीयों के सङ्ग
शरण में आए हम
हाथ बढ़ा के गले लगा लो
कर दो कृपा !
मनीषा मनीषा बढ़ती जा
निज प्यारे प्रभु को वरती जा
गाती जा प्रभु की अद्भुत महामहिमा
हे अग्ने ! हे तेजपुञ्ज !
मार्गदर्शक अग्रनेता
हो सबके उद्धारक
समझी तेरी कृपा
मनीषा मनीषा बढ़ती जा
निज प्यारे प्रभु को वरती जा
गाती जा प्रभु की अद्भुत महामहिमा










