मांगन की तो टाल न करते

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मांगन की तो टाल न करते

मांगन की तो टाल न करते
गरीब अमीर सरदार।
ऊंच-नीच का ख्याल न
करते होजाते लाचार-
खड़े हैं हाथ फैलाई जी ॥

नित्यकर्म जो करना चाहिए
ऋषि गए बतलाय।
टेक-क्या उल्टी रीत चलाई जी।
उसको करना छोड़ दिया
अब हुक्के से चित लाए-
करते खूब सफाई जी ॥

होते हवन सुगंधि फैले,
देते रोग को टार।
हुक्के से फैले दुर्गन्धि,
होण लगे बीमार कहते
इसे दवाई जी ॥

मुंह से दुर्गन्ध आवे
जब करे सामने बात।
मूंछ हुई धुंवे से पीली कोड़ी
जैसे हाथ कैसी मूर्खताई जी ॥

पीऊँ-पीऊँ करते फिरते
पीवन को के माठा।
अकल में तो धुंवा दे लिया
मुंह में दे लिया लाठा-
करते बोचाबाई जी ॥

पंचों का प्याला कहते
और हारे का विश्राम।
किसी-किसी को तो यह
टट्टी तारन का दे काम-
बैठा करे निमाई जी ॥