मांग बन्दे मांग उस भगवान से क्या मिलता

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मांग बन्दे मांग (तर्ज-दिल के अरमां)

मांग बन्दे मांग उस
भगवान से क्या मिलता
मांगकर इंसान से।।

मिल गया जो जिन्दगी
की राह में,
सबको ना दाता
समझ अज्ञान से ।।१।।

है वही सारे जमाने
का पिता,
उसका ही दामन
पकड़ जी जान से।।२।।

ले बना साथी
सखाओं का सखा,
फिर तूझे डर खौफ
क्या तूफान से ।।३।।

देखले घर में बैठा है कोई,
मिल जरा इक बार
उस मेहमान से।।४।।

तब कहो श्रीमान बैठोगे कहां,
भर लिया कश्ती को
जब सामान से।।५।।

तज सुपथ को क्यों
कुपथ पर चल पड़ा,
हो गयी गलती पथिक
नादान से ।। ६ ।।

जब मैं शंकर से मिला,
तब कुछ पता तेरा नहीं।
जब पता तेरा चला,
फिर पता मेरा नहीं।।