मन के अंधरे मेरे दूर कीजिये
मन के अंधरे मेरे दूर कीजिये,
करूणा निधान,
मेरो खाली झोली ज्ञान
से भरपूर कीजिये।
देने को दयालु तैने
सब कुछ दे दिया,
दोष मेरा मैंने उपभोग
ना किया,
सृष्टि भोग का मुझको
सहूर कीजिये ।। 1 ।।
गदिर्श हजार हों घबराऊँ ना
कभी खुशियाँ अपार हों बौराऊँ ना
कभी मुझ में सहन शक्ति
यह जरूर कीजिये। ।2।।
जब तक प्राण इस तन में चलें
भद्र भावनायें मेरे मन में पलें
अभद्र भावनाओं को
काफूर कीजिये।।3।।
कोई रंगरेली अट खेलियों में
मस्त सहेला सहेली कोई चेलियो में
मस्त प्रेमी अपनी भक्ति में चूर कीजिये।।4।।










