मन चन्द्रमा सा है यही जाने

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मन चन्द्रमा सा है यही जाने

मन चन्द्रमा सा है यही जाने
इसे सौम्य गुण कारक ही माने

परमेश्वर तो है पूर्णचन्द्र
गुण कर्म और स्वभाव में मन्द्र
सौम्य मनों में भरते तरंगे
सुख सागर सी भरते उमंगे
आह्लाद वर्धन करते जिया में
मन चन्द्रमा सा है यही जाने

मन की हवि से बने हम प्रार्थी
भाव ना जागे मन में अराति
करें याचना प्रार्थना, मिले शान्ति
शक्तियाँ मन की मिले भान्ति भान्ति
शरणामृत ! हम आए शक्ति पाने
मन चन्द्रमा सा है यही जाने

शक्ति मनन की मण्डित भर दो
वेद-शास्त्र की शिक्षा प्रवर दो
सत्य वचन सत्य भाषित स्वर दो
तद्अनुसार जीवन को कर दो
पशु-वृत्तियों से रखना बचा के
मन चन्द्रमा सा है यही जाने

ध्यान धारणा समाधि का धन
साक्षात्कार में लगा देना मन
ज्ञान और कर्म में होवे समन्वय
दृढ़ संकल्प का ना कभी हो क्षय
चित्ति-बल लगे मन में समाने
मन चन्द्रमा सा है यही जाने

तुम से ही पाएँ आर्द्र स्वभाव
उत्कर्ष का ना होवे अभाव
हे वृद्धचन्द्र माहिन इन्द्र !
दो सौम्यता का भाव विनम्र
मन का चटक चारु चाँद चमका दे
मन चन्द्रमा सा है यही जाने
इसे सौम्य गुण कारक ही माने
मन चन्द्रमा सा है यही जाने