मैं निर्मल मन लिये भगवन् !

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मैं निर्मल मन लिये भगवन् !

मैं निर्मल मन लिये भगवन्!
तेरे गुण गाने आई हूँ।
हे ! ज्योतिर्मय पिता ! तुमसे
मैं ज्योति पाने आई हूँ।। टेक ।।

हरे अज्ञान का परदा
समस्या हल यह हो जाये।
इसी से शांति वेला में
इसे सुलझाने आई हूँ।।
बहाकर अश्रुधारायें,
मिटा दें पाप तापों के।
करूं मैं मार्जन अपना,
इसे चमकाने आई हूँ।।

दो भक्ति दान हे भगवन्,
सुखद शांति के भंडार।
रहूँ सम्पर्क में तेरे,
यह वर पाने आई हूँ।।

किये संसार में सबसे,
सदा व्यवहार शुभ मैंने।
सरलता अपने जीवन की,
तुम्हें दिखलाने आई हूँ।।