महर्षि के बताये हुये मार्ग पर सारा संसार

0
26

महर्षि के बताये हुये मार्ग पर सारा संसार

महर्षि के बताये हुये
मार्ग पर सारा संसार
जिस दिन भी चल जायेगा
देख लेना उसी दिन यह वातावर्ण
सारा खुशियों के अन्दर बदल जायेगा।।

चौदह समुल्लास ऋषि के
अमर ग्रन्थ में निष्पक्षता से पढ़कर
जो आचरण करें मत मतान्तरों का बादल
जो छाया हुआ सत्य कहता हूं
दम्भर में टल जायेगा ।।1।।

मानवों में जो नफरत की दीवारें हैं।
यह अविद्या अंधरे की ही देन हैं।।
जब होगा उदय ज्ञान का भास्कर।
यह अविद्या अंधेरा निकल जायेगा। ।2।।

सारे मनुष्यों की जाति बस एक ही तो है।
वेद आज्ञानुसार मानव बन जाये सब ।।
उसके गिर जाने का कोई गम भी नहीं।
कलावादी जो खाकर सम्भल जायेगा। ।3।।

है सर्वोपरि एक वैदिक धर्म ।
जो मत और पंन्थ को धर्म मानता ।।
भेद खुलते ही ‘प्रेमी’ वह आश्चर्य से।
हाथ मारे शर्म के गसल जायेगा।।4।।