माफ करना मुझे मेरे प्यारे सजन
माफ करना मुझे मेरे प्यारे सजन,
मैं चली हूं तुम्हारे लिये लेने धन,
मैं थी भूखी पियाजी तेरे प्यार की,
ठोकरें यूं सही तेरे परिवार की,
आहें भरती रही, रोज करती रही,
इच्छाओं का दमन माफ करना ।।1।।
आपको भूख थी ज्यादा धन माल की,
तृप्ती कैसे करे बेटी कंगाल की,
होके मजबूर में, जा रही दूर में,
छोड़कर यह वतन, माफ करना।।2।।
किसी पहले जन्म के किये पाप की,
यह सजा थी में पत्नि बनी आपकी,
अपने कर्मों का फल भोगकर दई चल,
अब ना होगा मिलन, माफ करना ।।3 ||
भूलकर मुख्य जीवन के उद्देश्य को,
प्राथमिकता कलह लोभ राग द्वेष को,
भार ढोकर चले, प्रेमी खोकर चले,
व्यर्थ जग में जीवन, माफ करूगा।।4।।










