मधुर वेद वाणी धरा को सुनाओ

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मधुर वेद वाणी धरा को सुनाओ

मधुर वेद वाणी धरा को सुनाओ
सकल विश्व को फिर से आर्य बनाओ ।।
अभी लोग घड़ कर हैं मूरत बनाते
अभी भोग पाषाण को हैं लगाते ।
निराकार की पूजा उनको सिखाओ ।।

अभी पंथ नूतन बने जा रहे हैं
अविद्या अंधेरे में फंसे जा रहे हैं रहे हैं।
पढ़ो वेद और फिर सबको पढ़ाओ ।।
जो ये तर्क तोपों से स्वामी ने ढाये
गुरुड़म ने दुर्ग फिर से वो ही बनाये।
वही खड़ग खण्डन का फिर से चलाओ ।।

सुनो मात हिन्दी ने रोना सुनाया
कि घर के चिरागों ने घर को जलाया
निडरता से कर्तव्य अपना निभाओ ।।
अगर देश अपना बचाना तुम्हें है
अगर भाग्य सोया जगाना तुम्हें है।
तो फिर जाति-पाति के झगड़े मिटाओ ।।