लाखों जनम मैं तेरे
लाखों जनम मैं तेरे
ध्यान करूँ निराकार,
कहीं भी रहूँ मैं तुझे, करता रहूँगा जाष ।।२।।
छोटा समझ के भूल न जाना,
हे निराकार ध्यान में आना
याद दिलाना सर्वाधार…।।
लाखों जनम तेरे…।।० ।।
अन्तरा – सुबह-साम भजु मैं तुझको,
जीवन देकर अपना, दिल में बिठाके
तुझे, मैं करता रहूँ साधना-२
मैं अपना बनाके तुझे-२,
करता रहूँ मैं फरियाद ।।
कहीं भी रहूँ मैं तुझे करता रहूँगा याद ।।
लाखों जनम तेरे… ।।१।।
तेरी भक्ति से मिले मुझको खुशियां
और आशाएं गाऊँ मैं तेरा भजन,
गुंजे ये चारो दिशाएं… २
तन मन को लगा के तुझे,
मैं करता रहूँगा ध्यान ।।
कहीं भी रहूँ मैं तुझे करता रहूँगा याद ।।
लाखों जनम तेरे…।।२।।










