लाखों जगाने वाले आये

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लाखों जगाने वाले आये (धुन- मिलो न तुम तो दिल घबराये)

लाखों जगाने वाले आये
फिर भी ना जग पाये।
तुम्हें क्या हो गया हैं।। टेक ।।
जिन्होंने तुमको गले लगाये,
तुमने वही मिटाये।। तुम्हें. । टेक।

ओ प्यारे भारतीयो खाकर
क्यों सो गये गोली भंग की।
अपना पराया भूले सुध बुध
बिसारी सारे अंग की।।
बारूद ऊपर लेट लगाये,
फिर भी ना घबराये।। तुम्हें।।1।।

ओ प्यारे साथियों आज
तुम खड़ें हो उस स्थान पर।
जहां से है बचना मुश्किल
अब भी रैंगी जो जूकान पर ।।
फिर कोई शक्ति नहीं बचाये,
चाहे लाख बुलाये। तुम्हें।।2।।

ओ प्यारे भाइयों दुश्मन
तुम्हारा कुल संसार है।।
नाव भंवर में मांझी नशे
में है टूटी पतवार हैं।
प्रेमी किनारे कौन लगाये,
नैया चक्कर खाये।। तुम्हें।।3।।