लहरों से डरकर के नौका पार नहीं होती।

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लहरों से डरकर के नौका पार नहीं होती।

लहरों से डरकर के
नौका पार नहीं होती।
कोशिश करने वालों की
हार नहीं होती ।। टेक ।।
नन्हीं चींटी जब दाना
लेकर चलती है।


चढ़ती दीवारों पे सी
बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों
में साहस भरता है।
चढ़कर गिरना गिरकर
चढ़ना ना अखराता है।
मेहनत उसकी खाली
हर बार नहीं होती ।। १ ।।

डुबकियाँ सिन्धु में
गोताखोर लगाता है।
जा-जा के फिर खाली
हाथ वो लौट के आता है।
मिलते ना सहज ही
मोती गहरे पानी में।


बढ़ता दुगुना उत्साह
उसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली
हर बार नहीं होती ।। २ ।।

असफलता चुनौति
है स्वीकार करो।
क्या कमी रह गई
देखो और सुधार करो।


जब तक ना सफल
होओ चैन की नीन्द त्यागो ।
संघर्षों का मैदान
ना छोड के तुम भागो।
कुछ किए बिना ही
जयजयकार नहीं होती ।। ३ ।।