क्यों सोए हुए फले कितने मतों के आर्यवीरो

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क्यों सोए हुए फले कितने मतों के आर्यवीरो

क्यों सोए हुए फले
कितने मतों के आर्यवीरो,
तुम जगे तो जमाना बदल जायेगा।
यहां जाल हैं, फंस रहे हैं
सभी के बुरे हाल हैं।

करो साहस से आफत का तुम सामना,
हो सफल फिर तुम्हारी ‘अनल’ कामना।
वही पायेगा मंजिल रुकेगा न जो-
जो भी बैठा रहेगा वह पछतायेगा।
क्यों सोए हुए आर्यवीरो…..।

राह वेदों की सच्ची सुझादो,
गिरते-गिरते भी मानव संभल जायेगा।
क्यों सोए हुए आर्यवीरो……।

सारी दुनिया की नजरें तेरी ओर हैं,
चाहते सुख-शान्ति का वे सभी छोर हैं।
‘मनुर्भव’ का पढ़ा पाठ संसार को,
द्वेष के सर्प का फन कुचल जायेगा।
क्यों सोए हुए आर्यवीरो…..।

जरा ताकत को अपनी
तुम पहचान लो,
रोक बाहों में फिर तो
तुम तूफान लो।
गर जरा दिल में अपने
तुम ये ठान लो-हर मुसीबत का
फिर दम निकल जायेगा।
क्यों सोए हुए आर्यवीरो…..।