क्या भरोसा है इस जिन्दगी का
क्या भरोसा है इस जिन्दगी का,
साथ देती नहीं ये किसी का।
क्या भरोसा…।।
अन्तरा श्वास रूक जायेगी, चलते-चलते ।
समा बुझ जायेगी, जलते जलते ।
नाम रह जायेगा आदमी का ।
साथ देती नहीं ये किसी का ।।
क्या भरोसा है… ।।१।।
जिन्दगी की हकिकत पुरानी ।
चलके रूकना है, इसकी कहानी ।
फर्ज पूरा करो बन्दगी का ।
साथ देती नहीं ये किसी का ।।
क्या भरोसा है…।।२।।
ध्यान हमेशा, प्रभु का लगाना,
किसी दुःखियों की, बिगड़ी बनाना ।
जिन्दगी नाम है बस इसी का ।
साथ देती नहीं ये किसी का ।।
क्या भरोसा है…।।३।।










