कुछ तो चले गये है
कुछ तो चले गये है
दिन बाकी ना यूं बेकार कर
जीने में क्या मजा रहा
भूलों का अब सुधार कर ।।१।।
हस हे तू कागा न बन गंदा न कर
इस नाम को रौशन जहाँ में नाम
हो ऐसा ही कुछ सरकार कर ।।२।।
सोना है यह नर तन तेरा सोने में
ना इसको गवाँ कर्मों के मोती खोज
कर जीवन गुलों गुलजार कर ।।३।।
भूल जा बीता हुआ याद कर कल
का सवेरा आशा की किरणें कह
रही जीवन वसंत बहार कर ।।४।।
अन्दर ही तेरे देव है भटके ना
कहीं और तू सत् का सुरेन्द्र रास्ता
वैदिक धर्म स्वीकार कर ।।५ ।।










