भक्ति
कुछ नेक काम कर ले, दुनियां में आने वाले।
दर छोड़ पाप का तू, जीवन सफल बना ले।।
कुछ नेक काम कर ले……….
जायेगा जब जहाँ से, कुछ भी न साथ होगा।
दो गज कफन का टुकड़ा, तेरा लिबास होगा।
बेहतर है इससे पहले, मन साफ तू बना ले।।1।।
कुछ नेक काम कर ले……
आया है तू कहाँ से, जाना बता कहाँ है।
रहने को इस जहाँ में, तेरा मकां कहाँ है।
इक रात के मुसाफिर, चलना तुझे सबेरे।।2।।
कुछ नेक काम कर ले……..
सिफतें करेंगे तेरी, दुनियां के लोग सारे।
गर तू सही लगन से, प्रभु नाम को पुकारे।
भक्ति से अपनी ‘दर्शन’ अपना उसे बना ले। ।3।।
कुछ नेक काम कर ले……….










