कुछ न बिगड़ेगा तेरा, प्रभु की शरण आने के बाद।

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कुछ न बिगड़ेगा तेरा, प्रभु की शरण आने के बाद।

कुछ न बिगड़ेगा तेरा,
प्रभु की शरण आने के बाद।
हर खुशी मिल जाएगी,
चरणों में झुक जाने के बाद।
जब तलक है भेद मन में,
कुछ नहीं बन पाएगा।
रंग लाएगी ये भक्ति,
भेद मिट जाने के बाद।
कुछ न बिगड़ेगा तेरा, प्रभु की शरण……

फूलों से पूछो के उन पर,
कैसे छाई है बहार।
कब तलक कांटों पे सोया,
डाल कर आने के बाद।
प्रेम की मंजिल में राही,
कष्ट आते हैं जरूर।
बीज फलता है सदा,
मिट्टी में मिल जाने के बाद।।
कुछ न बिगड़ेगा तेरा, प्रभु की शरण……

कौन करता है किसी को,
याद मर जाने के बाद।
सूंघता कोई नहीं है फूल,
मुरझाने के बाद।।
देख कर काली घटा को,
ए भौरे मत हो उदास ।।
बंद कलियाँ भी खिलेंगी,
रात ढल जाने के बाद।।
कुछ न बिगड़ेगा तेरा, प्रभु की शरण……

जिन्दगी विषयों में खोई,
हरि भजन भी न किया।
होश में आया है इंसा,
ठोकरें खाने के बाद ।।
जिस खुशी को ढूंढ़ता फिरता है
दुनिया में सदा।
वो खुशी मिल जाएगी,
प्रभु चरणों में झुक जाने के बाद ।।
कुछ न बिगड़ेगा तेरा, प्रभु की शरण……