वैराग्य
कुछ काम करके जाना,
दुनियाँ से जाने वाले।
जाते हैं रोज लाखों,
बेकार खाने वाले।।
चौरासी लाख खोये,
हर जन्म-मरण रोये।
अब व्यर्थ मत गंवाना,
दिन चार जीने वाले।।
कुछ काम करके जाना………
हिंसा असत्य चोरी,
कर कर के माया जोड़ी।
क्या साथ ले चलेगा,
सब छोड़ जाने वाले ।।
कुछ काम करके जाना……..
झूठे जगत के रिश्तों से,
करता है क्या मोहब्बत।
सब छोड़ने पड़ेंगे,
नहीं साथ जाने वाले।।
कुछ काम करके जाना…….
मर कर भी गम ना होगा,
कुछ नेक काम कर ले।
अब बेखबर ना रहना,
दुनियाँ से जाने वाले।।
कुछ काम करके जाना……..










