कृष्ण न भगवान् थे, न साधारण इन्सान थे

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कृष्ण न भगवान् थे, न साधारण इन्सान थे

कृष्ण न भगवान् थे,
न साधारण इन्सान थे,
वे वेदज्ञ विद्वान थे,
उनके सारे ही काम महान थे

उनका बचपन अद्भुत और महान् था,
बारह वर्ष तपस्या ध्यान भी महान था।
राजसूय यज्ञ में सम्मान भी महान् था,
तो चरण धोने का काम भी महान् था।

वे दुःखितजनों के प्राण थे,
दुष्टों के लिए घातक बाण थे,
इसीलिए मित्र ही नहीं शत्रु भी
करते उनका बड़ा सम्मान थे
कृष्ण न भगवान थे, न……….

उनका दिया गीता-ज्ञान भी महान् था,
युद्ध में सारथी का काम भी महान् था
उनका सन्धि प्रस्ताव का बयान भी महान् था,
तो सब समस्याओं का समाधान भी महान् था।

वे अन्यायियों के लिए काल थे,
सत्पुरुषों का रखते बड़ा ख्याल थे,
इसीलिए बाल, तरुण,
वृद्ध सब जन गाते उनके गुणगान थे
कृष्ण न भगवान थे, न………….

उनका कष्टों में मुस्कराना भी महान् था
सुखों में न इतराना भी महान था
विपत्तियों में न घबराना भी महान था
अन्याय को मिटाना ही काम प्रधान था।

वे धूर्तों की न चलने देते चाल थे,
मस्ती में रहते हमेशा खुशहाल थे,
कंस, शिशुपाल को मार कहलाये
सबसे अधिक बुद्धिमान थे।
कृष्ण न भगवान थे, न………