योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण का शील हरण

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वर्तमान में श्री कृष्ण के नाम पर आनेको भ्रांति फेलये जा रही है उसके खंडन में एक लेख प्रस्तुत

कृष्ण एक महान वैज्ञानिक, युग प्रवर्तक, योगेश्वर, भगवान महापुरुष, शब्द कम पड़ जाएंगे यदि कृष्ण की महानता को बयां किया जाए तो। वह कृष्ण जिसने सब कुछ हारे हुए पांडवों को विश्व का चक्रवर्ती सम्राट बना दिया, वह कृष्ण जिसने गीता का ज्ञान दिया, वह कृष्ण जिसने सुदर्शन जैसे शस्त्र को धारण किया। हाय! क्या दुर्दशा कर दी इस महान महापुरुष की इन पोंगे पुजारियों ने पौराणिक वादियो ने दुष्टों ने । इस महान महापुरुष को राधारमण ,छलिया, माखन चोर, वेणुगोपाल ,लड्डू गोपाल,वस्त्र चुराने वाला ,ना जाने क्या-क्या बोल दिया?

———पुराणों के कृष्ण——-

श्रीमद्भागवत गीता के रास पंचाध्याई दशम स्कंध १९-३३ अध्याय तक कृष्ण के गोपियों के साथ रास क्रीड़ा के समय उनके साथ व्यभिचार का स्पष्ट उल्लेख है इसी प्रकार दशम स्कंध के अध्याय ४८ के श्लोक क्रम १-१० तक कुब्जा के साथ व्यभिचार का वर्णन है।
श्री शुकदेव उवाच-

हे राजन! तदनंतर सर्वात्मा सर्वदर्शी भगवान काम से संतृप्त हुई कुब्जा का प्रिय करने की इच्छा से उसके घर गए॥ १॥ हरि भक्त उद्धवजी आसन छोड़कर पृथ्वी पर बैठ गए कृष्ण जी लोक रिति का अनुकरण करते हुए शीघ्र ही महा मूल्य सैया पर पधारे।।४।। कुब्जा भी मंजन, आलेखन, रेशमी वस्त्र, आभूषण, फूल माला ,पान, सुगंधित पदार्थ ,और अमृत के समान पदार्थों से शरीर को सजाएं लज्जा युक्त लीला से हंसती कटाक्ष निक्षेप करती श्री कृष्ण के निकट आई।।५।। श्री कृष्णा नवीन लज्जा से कारण कुछ एक डरती हुई सुंदरी को बुलाए उसके कंकण से भूषित दोनों हाथ पकड़ सैया पर लिटा कर क्रीड़ा करने लगे।।६।।(इसी घृणित घटना को लेकर भले घरों की स्त्रियां”घर की नारी छोड़ कृष्णा तू ही कुब्जा मन भाई”गाती है ।
इसी प्रकार इसी स्कंध में अध्याय ९० श्लोक २९ तथा ३१ में श्री कृष्ण की १६१०८ पत्नियां और प्रत्येक के १०-१० पुत्र उत्पन्न हुए बताकर इस महात्मा के चरित्र को कलंकित किया गया है। (ऐसे काल्पनिक और चरित्रहीनता को प्रदर्शित करने वाले भागवत की कथाएं लगभग हर गली चौराहे में होती मिलेंगी)।

—-राधा कृष्ण लीला—-
कृष्ण के चरित्र को बताने वाली भागवत में कहीं भी राधा का नाम नहीं है। बल्कि राधा का नाम ब्रह्मवैवर्त पुराण में आता है और यह वर्णन भी बहुत अश्लील है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण प्रकृति खंड २ अध्याय ४९-राधा वृषभान वैश्य की कन्या थी उसने उसका संबंध रायाण वैश्य से करा दिया। रायाण श्री कृष्ण की माता यशोदा का भाई था। गोलोक में वह कृष्ण का अंश था किंतु संबंध से वह कृष्ण का मामा था। इस प्रकार गोलोक के नाते श्री कृष्ण का रायण अंश होने से पुत्र तथा राधा श्रीकृष्ण की पुत्रवधू और इस लोक के नाते मामी हुई। संसार में केवल इस लोक क का नाता ही माना जाता है। किसी पुराण मैं जो राधा कृष्ण के गुप्त अनुचित संबंध का वर्णन है वह इच्छा ना होते हुए भी यहां इसलिए लिखना पड़ रहा है कि लोग इन पुराणों में श्रीकृष्ण पर जो धूर्तता पूर्ण आरोप लगाए गए हैं उनका नग्न चित्र देख और पढ़ सके। ब्रह्मवैवर्त खंड ४ अध्याय १२५-एक दिन कृष्ण सहित नंद जी वृंदावन में गए।।१।। कृष्ण ने आकाश बादलों से युक्त बना देखा।।३।। इतने में राधा कृष्ण के पास गई।।८।। बालक को राधा ने ले लिया सुख से मधुर हंसने लगी।।२८।। काम वस उसे बगल में लेकर छाती से लगाकर चुम लिया।।३८।। इतनी में राधा ने सैकड़ों रत्न के घोड़े से परिपूर्ण माया से बनी सुंदर मंडप देखा।।३९।। कामना के योग्य जवान श्यामसुंदर।।४३।। सुंदर हंसमुख पुरुष को पुष्प शैया पर सोते देखा।।४७।।

अपनी गोदी को बालक से खाली और उस नवयुवक को देखा।।५२।। कमल मुख वाली को कृष्ण कहने लगे।।५४।। हे प्रिय चारपाई पर आ जा और मुझे बगल में ले ले।।६१।। मैं बैठा हूं आप लेटे हैं इसी प्रकार समय जा रहा है।।८१।। ब्रह्मा ने राधा का हाथ कृष्ण के हाथ में पकड़ा।।१२४।। राधा कृष्ण को प्रणाम करके कृष्ण के पलंग पर गई।।१३१।। कृष्ण ने चबाया हुआ पान राधा को दिया।।१४३।। काम जिसके चरणों को स्मरण करता था राधा के संतोष अर्थ वह कृष्णा उसी काम के वश में हो गए।।१४६।। कृष्ण ने हाथ से पकड़ कर राधा को बगल में ले लिया उसके कपड़े ढीले कर दिए और चतुर्विध चुंबन लिया।।१४८।। काम युद्ध की समाप्ति पर वह तिरछी नजर वाली राधा मुस्कुराने लगी।।१५९।। वह कृष्ण युवावस्था को छोड़कर सिर्फ बालक रूप हो गए राधा ने कृष्ण को बाल रूप में भूख से पीड़ित रोते हुए देखा।।१६३।।

—–चीर हरण लीला——
भागवत स्कंध १० अध्याय १२ मैं कृष्ण के वेणु गीत गान द्वारा गोपियों के कामोद्दीपक का वर्णन है। अध्याय २२ मैं इन गोपियों का वेणु गीत से कामातुर होकर कृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कात्यायनी देवी की पूजा का उल्लेख है। एक दिन यह गोपिया पूजा से पूर्व अपने वस्त्र उतारकर यमुना में स्नान कर रही थी। श्री कृष्ण उनके वस्त्र लेकर कदम के पेड़ पर चढ़ गए। जब इन स्त्रियों ने वस्त्र मांगे तो उन्होंने इन्हें जल से नग्न अवस्था में ही बाहर निकल कर वस्त्र लेने का आग्रह किया। यह नितांत नंगी थी ।उनके शरीर पर कोई वस्त्र नहीं था ।

विवश होकर ही अपने हाथों से अपने गुप्त अंग को छुपाकर बाहर आई। कृष्ण इतने से संतुष्ट नहीं हुए उन्होंने उनको अपने दोनों हाथों को उठा कर सूर्य को प्रणाम करने के पश्चात वस्त्र लौट आए। (आप स्वयं विचारे की लज्जा स्त्री का आभूषण होता है। इसलिए स्त्रियां क्यों सार्वजनिक स्थान पर स्नान करेंगे जहां लोगों का आना जाना हो। दूसरी बात- स्त्रियां आखिर समूह में निर्वस्त्र होकर क्यों नहाऐंगी
इससे स्पष्ट होता है कि यह प्रकरण बिल्कुल झूठ है)
मैथिल कोकिल विद्यापति और बंगाली कवि चंडी दास ने राधा कृष्ण के नाम पर उद्दान श्रृंगार की जो धारा बहाइ उससे सारा पूर्वी भारत आपला वित्त हो गया। मध्यकाल में रसिक कवि सूरदास ने वल्लभ संप्रदाय अनुयाई होते हुए भी राधा कृष्ण के प्रेम की जो योजना बनाई कि यद्यपि वे विद्यापति आदि कवियों से अधिक सुरुचिपूर्ण कविता लिख सकें परंतु हिंदी के आगे आने वाले कवियों को तो पूरी स्वच्छंदता प्रदर्शित करने का अवसर मिल ही गया। सूरदास का श्रृंगार वर्णन भी कई स्थलों पर मर्यादा का अतिक्रमण कर गया है।”जबहिं सरोज धरायों श्रीफल पर”आदि अत्यधिक घिनैने और कुरुचिपूर्ण वर्णन परवर्ती कवियों को खुलकर खेलने का आधार बन गए।

—–महाभारत के कृष्ण—–

कृष्ण का वंश परिचय —

श्री कृष्ण यदुवंशी यादव वंश के दो वंश हो गए थे प्रथम- वृष्णि द्वितीय-भोज। भोजो के फिर दो भेद हुए कुकुर और अंधक। श्री कृष्णा वृष्णियो में से थे।
कृष्ण का विवाह—-

विदर्भ के राजा भिस्मक की कन्या का नाम रुकमणी था। रुकमणी बड़ी रूपवती और गुणवती थी। कृष्ण और रुक्मणी का विवाह संयोग हार्दिक प्रेम पर आधारित था ।उत्तम संतान की प्राप्ति के लिए यह आवश्यक है । इतना ही नहीं श्रेष्ठतम संतान उत्पत्ति के विचार से इन दोनों ने विवाह के पश्चात १२ वर्ष का कठोर ब्रम्हचर्य किया। इस तपस्या पूर्ण साधना का फल -प्रद्युम्न । कृष्ण को इस दिव्य संतान का कितना अभिमान था कि जहां कहीं भी प्रद्युम्न का वर्णन करते हैं उसे” में सुतः”मेरा पुत्र कहते हैं।
या था कृष्ण का उत्तम चरित्र । जिसे भागवत कारों ने इतना विकृत रूप से प्रस्तुत किया कि आजकल घरों में गीत गाते हैं जय हो राधा रमण, मनिहारी का भेष बनाया श्याम चूड़ी बेचने आया, श्यामा रास रचाने आओ। ऐसे गीतों को हमें गाना बंद करना चाहिए जिससे कृष्ण का अपमान हो। हमें मुखर कर विरोध करना चाहिए कथावाचकओ का उन टीवी सीरियलओं का जो कृष्ण का अपमान करते हैं।

NOTE-कृष्ण के चरित्र को जानने के लिए हमें महाभारत अवश्य पढ़नी चाहिए।