कोई आ जाए तो जगा जाए

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कोई आ जाए तो जगा जाए

कोई आ जाए तो जगा जाए
जीवन में यज्ञ समा जाए
हमें राह सुपथ की दिखा जाए
कोई आ जाए तो जगा जाए

यज्ञ तुम्हारे देखे हैं प्रभु
इस सन्सार में आते जाते
हर देवों को देखा हमने
हर प्राणी को सुख पहुँचाते
हमको भी याज्ञिक देव बना
कोई यज्ञ का पाठ पढ़ा जाए
कोई आ जाए तो जगा जाए
जीवन में यज्ञ समा जाए
हमें राह सुपथ की दिखा जाए
कोई आ जाए तो जगा जाए

पाप कर्म से क्यों दु:ख झेलें
बीच भँवर का भय क्यों ले लें
क्यों ना जग की यज्ञशाला में
बैठ के प्रभु से गरु-गुण ले लें
पाप की कश्ती है टूटी हुई
उसे कैसे पार किया जाए
कोई आ जाए तो जगा जाए
जीवन में यज्ञ समा जाए
हमें राह सुपथ की दिखा जाए
कोई आ जाए तो जगा जाए

पाप दु:खों से बचना है तो
सत्यासत्य विवेक जगाएँ
प्रभु की शरण में ज्ञान प्रकाश की
याचना कर जीवन को जितायें
सात्विक हृदय की शुभ याचना
कैसे ना प्रभु से सुनी जाए ?
कोई आ जाए तो जगा जाए
जीवन में यज्ञ समा जाए
हमें राह सुपथ की दिखा जाए
कोई आ जाए तो जगा जाए

कष्ट क्लेष सम हिन्साएँ
पाप के फल के रूप में आतीं
रह रह के सारा जीवन भर
जान का दुश्मन बन के सतातीं
जान-बूझकर फिर क्यों दु:ख की
आग को हम सुलगायें
कोई आ जाए तो जगा जाए
जीवन में यज्ञ समा जाए
हमें राह सुपथ की दिखा जाए
कोई आ जाए तो जगा जाए

हे आत्मन् ! वरणीय वरुण की
शरण में जाकर माँग ले ज्योति
ज्ञान प्रकाश की कर ले याचना
जो है सुख-शान्ति की बपौती
कष्टों के मूल है पाप तेरे
फिर क्यों ना इसे भगा पाए
कोई आ जाए तो जगा जाए
जीवन में यज्ञ समा जाए
हमें राह सुपथ की दिखा जाए
कोई आ जाए तो जगा जाए