किस्मत का नहीं हूँ दीवाना

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किस्मत का नहीं हूँ दीवाना (कर्मवीर के उद्‌गार)

किस्मत का नहीं हूँ दीवाना,
आशिक हूँ मै तदवीरों का,
मुझसे रोना नहीं आता है
इन फूटी हुई तकदीरों का।

कर्म है मेरे हाथों में जैसा
चाहूं वेसा कर दूं।
मैं नहीं भरोसा करता हूँ
हाथों की चन्द लकीरों का ।।1।।

जो कहता हूँ वही करता हूँ,
जो करता हूं वही कहता हूँ,
कथनी करनी में फर्क नहीं,
आदि हूं नहीं तकरीरों का।।2।।

जिन्दगी व मौत में फर्क है क्या,
इस राज से भी मैं वाकिफ हूँ,
सिलसिला खत्म ना हो यह कभी,
लम्बा काफिला सफीरों का।।3।।

भक्ति तर्पण में क्या जानूं
फुर्सत नहीं अपने कामों से,
प्रेमी हूँ दीन अनाथों का,
खादिम हूँ नहीं अमीरों का।।4।।